-- आगामी कार्यक्रम --

1) 9Nov - 17Nov
राम बालक जी महाराज जयपुर वृन्दावन

2) 19Nov-26Nov
जयेश भाई जोशी मुंबई

3) 7Dec-28Dec
माँ भवानी मंदिर आचार्य भोपाल द्रिवेदी छत्तीसगढ़

View more
* स्थल वर्णन *
श्री ललिता देवी
श्री चक्रतीर्थ
* प्रमुख स्थल *
श्री भूतेश्वर नाथ महादेव
श्री मॉ आनन्दमयी आश्रम
श्री स्वामी नारदानन्द आश्रम
श्री सीता रसोई मन्दिर
श्री देव देवेश्वर-महादेव
हत्या हरण
श्री ललिता देवी
   

पुराणों में नैमिषारण्य में लिगं धारिणी नामक देवी का वर्णन प्राप्त होता हैं। लेकिन अब हजारों साल से यहाँ ललिता देवी के नाम से विखयात हैं। वाराणस्यां विशालाक्षी नैमिषेलिंग धारिणी। प्रयागे ललिता देवी कामुका गन्ध मादने (देवी भागवत)॥ नैमिषारण्य में ललिता देवी का वर्णन १०८ देवी पीठों में आता है। देवी भागवत में लिखा है कि दक्ष द्वारा अपने पति के अपमान को न सह सकी तथा अपने प्राणों की आहुति दे दी। तब शंकर जी ने अपने गणों के द्वारा यज्ञ को नष्ट-भ्रष्ट कर डाला और सती के शव को लेकर इधर-उधर विचरण करने लगे उनके नरसंहार कार्य से विरत न होते देखकर विष्णु भगवान ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शव के १०८ टुकड़े कर डाले इसी शव के अपने अंश जिन-जिन स्थानों पर गिरे वहाँ पर देवी पीठ बन गया।नैमिषारण्य में भी शव का हृदय गिरा जिससे यहाँ पर भी सिद्ध पीठ के नाम से विखयात हुआ। यह नैमिष का प्रधान दरबार है। हर नवरात्र में यहाँ पर अपार भीड होती है। देवी जी वर्णन देवी भागवत में भी प्राप्त हैं।