-- आगामी कार्यक्रम --

1) 9Nov - 17Nov
राम बालक जी महाराज जयपुर वृन्दावन

2) 19Nov-26Nov
जयेश भाई जोशी मुंबई

3) 7Dec-28Dec
माँ भवानी मंदिर आचार्य भोपाल द्रिवेदी छत्तीसगढ़

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* स्थल वर्णन *
श्री ललिता देवी
श्री चक्रतीर्थ
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* प्रमुख स्थल *
श्री भूतेश्वर नाथ महादेव
श्री मॉ आनन्दमयी आश्रम
श्री स्वामी नारदानन्द आश्रम
श्री सीता रसोई मन्दिर
श्री देव देवेश्वर-महादेव
हत्या हरण
 
हनुमान गढी
   

लंका में राम जी की सेना में सुबह हाहाकार मच गया। हनुमान जी उस समय पहरे पर थे उन्होंने कहा कि, रात्रि के समय केवल विभीषण जी आये थे विभीषण ने कहा-कि मैं तो शाम से यही था। विभीषण जी जान गये मेरा रूप केवल पाताल का राजा अहिरावण ही बना सकता है , अत : वही राम और लक्ष्मण को चुरा ले गया। वहाँ श्री पवन सुत्र ही जा सकते है। हनुमान जी तुरन्त पाताल पहुंचे। वहाँ मकरध्वज द्वार पर थे उनसे युद्ध करके उनको अपनी पूंछ में बाँध दिया और अदंर प्रविष्ट हो गये। तभी देवी जी अर्न्तध्यान हो गयी तथी हनुमान जी देवी के स्थान पर विराजमान हो गये।और बड़ी ही तीव्र गति से गरजने लगे अहिरावण ने समझा कि आज देवी बहुत ही प्रसत्र है। उसने देवी की विधिवत पूजा प्रारम्भ की। पूजा समाप्ति के पश्श्चात उसने राम और लक्ष्मण को मंगवाया ।
काल के गाल में पडा हुआ अंहकारी असुर बोला -अब कुछ ही देर में तुम दोंनों भाई देवी की भेंट चढा दिये जाओगे। अपने इष्ट को याद कर लो। प्रभु को मौन देखकर लक्ष्मण जी अत्यन्त विस्मित थे। और कुछ समझ नहीं पा रहें थे। कि प्रभु कैसी लीला कर रहे है। उसी समय भगवान राम ने भाई लक्ष्मण से कहा -भाई लक्ष्मण! समस्त प्राणी दुःख के समय हमारा स्मरण करते है। किन्तु हमारे दु :खो का हरण करने वाले तो पवन कुमार ही है। अत :हम लोग उन्हीं का स्मरण करे। भगवान श्री राम की बात सुनकर अंजनी नंदन ने इतनी तीव्र गति से गर्जना की तो ऐसा लगा मानो आकाश फट जायेगा। पाताल काँप गया अहिरावण की आँखे बन्द हो गयी इतनी ही देर में हनुमान जी ने अहिरावण से तलवार छीनकर एक ही वार में अहिरावण का सर अलग कर दिया। इस प्रकार हनुमान जी ने अहिरावण का बध किया श्री राम चन्द्र जी हनुमान पुत्र मकरध्वज को पाताल का राज्य दे दिया और हनुमान जी राम लक्ष्मण को कधों पर बिठाकर पातालपुरी से नैमिषारण्य में प्रकट हुए। ऋषियों के दर्शन किया और दर्शन दिया फिर लंका प्रस्थान किया।
      यहाँ से लंका दक्षिण मुखी हनुमान जी हैं। जिस किसी के द्रानि राहु केतु मंगल ग्रह अरिष्ट होते हैं। वे श्री दक्षिण मुखी पाताल विजयी हनुमान जी का चोला चढ़ाने से सभी ग्रह शान्ति होते हैं। तथा समस्त प्रकार के कष्टों से छुटकारा मिलता हैं। यह हनुमान जी का सिद्धि पीठ हैं। यहाँ पर मान मनौती रखने से मनोकामना पूर्ण होती हैं। ग्रह शान्ति एवं अन्य कार्यों के लिए अनुष्ठान होते हैं। यह नैमिषारण्य का अति प्राचीन स्थल हैं और दर्शनीय स्थल है। जो भक्त यात्री गण ग्रह शान्ति हेतु श्रृंगार एवं अनुष्ठान कराना चाहे तो सम्पर्क करें यहाँ पर सर्व कामना पूर्ण हेंतु एवं ग्रह शान्ति हेतु जो भक्त अनुष्ठान पूजन एवं श्रृंगार कराना चाहें वे संचालक से सम्पर्क करें ।

   
व्यवस्थापक -महंत बजरंग दास
श्री हनुमान गढ़ी पाँडव किला, नैमिषारण्य, सीतापुर
संचालक -पवन कुमार शास्त्री
श्री हनुमान गढ़ी पाँडव किला, नैमिषारण्य, सीतापुर